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    सम्बन्ध का अनुबंध

    सम्बन्ध का अनुबंध
    8 July

    मैं तू नहीं,तू मैं नहीं,
    कुछ अलग तुझमें कहीं
    कुछ अलग मुझमें कहीं,
    न तू गलत,न मैं गलत
    न तू सही,न मैं सही,
    फिर किस भरम में है पड़ा
    क्यों सिर्फ अपने में अड़ा।
    कुछ मान ले,कुछ जान ले,
    सम्बन्ध के अनुबंध को
    कुछ सोचकर पहचान ले।
    कोई अकेला कुछ नहीं,
    न तू सही,न मैं सही
    तेरे करम मुझमें अड़े,
    मेरे करम तुझमें फंसे
    तू बिना जग के नहीं,
    जग सिर्फ तू ही तो नहींll
    रचनाकार- कुलदीप गौड़ “जिज्ञासु”



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