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    छात्र के लिये बुलाई गयी पुलिस

    छात्र के लिये बुलाई गयी पुलिस
    8 July

    गत 2 मई 2019 को छात्र अपने संबंध की कागज लेने के लिए प्रशासनिक कार्यालय में उपस्थित हुआ। उसने अपने संबंध का पत्र कर्मचारी से मांगा तो पहले तो उसे खूब घुमाया गया पर जब छात्र ने थोड़ा दबाव बनाया तो कर्मचारी द्वारा अपने से बड़े अधिकारियों से पूछकर छात्र से रिसीविंग पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए। छात्र ने रिसीविंग पत्र पर हस्ताक्षर के साथ कुछ टिप्पणी भी लिखी जो कि पत्र संबंधित तथ्यों पर ही थी। इस पर कर्मचारी ने व शोध अधिकारी ने पत्र देने से इंकार कर दिया और छात्र के साथ शोषण करने लगे। छात्र प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुआ तो प्रशासनिक अधिकारी द्वारा उसे अभद्रता करके पत्र देने से साफ-साफ इंकार कर दिया गया। उससे असंवैधानिक तरीके से पत्र लिखने के लिए कहा गया और तभी पत्र देने के लिए कहा। छात्र ने आपत्ति व्यक्त की कि मेरा ही कागज, मुझे ही पाने के लिए क्या पत्र लिखना होगा? इस पर अधिकारी द्वारा गार्ड को बुला लिया गया और कहा गया कि इसे यहां से बाहर करो छात्र ने आपत्ति व्यक्त की तथा निवेदन ग्रहण करने के लिए आग्रह किया किंतु अधिकारी तो अपने पद के दुरुपयोग पर आमदा थे। छात्र लाचार था किंतु 2 छात्रों ने छात्र का साथ दिया जिससे अधिकारियों को उसकी बात सुनने के लिए मजबूर होना पड़ा आपातकाल में अधिकारी द्वारा अन्य कनिष्ठ अधिकारियों को बुलाया गया बातचीत प्रारंभ हुई छात्र ने अपने तर्क रखें उस पर आरोप लगाए गए छात्र ने सब का खंडन करते हुए अधिकारी को उत्तरदाई बनाते हुए प्रश्न किए किंतु अधिकारी और ना कनिष्ठ अधिकारी उसकी किसी बात का जवाब दे पाए। इसी बीच उच्च अधिकारी द्वारा छात्र को धमकाने के लिए पुलिस को बुला लिया गया किंतु पुलिस ने अपने कर्तव्य का निर्वाह किया उन्होंने छात्र को और छात्र के सच्चाई को देखते हुए पत्र प्राप्ति में मदद की। उन्होंने छात्र को कहा और साथ ही अधिकारी को भी कहा कि शिक्षा के मंदिर में हमें बुलाने का अवसर क्यों प्रदान करते हो? छात्र ने उन्हें भी अपनी समस्या बताई और कहा कि जब तक मुझे पत्र नहीं मिलेगा मैं यहां से नहीं जाऊंगा आप चाहे जो कुछ कर ले। इस पर सामान्य रूप से एक पत्र उच्च अधिकारी को दिया गया, जिस पर अधिकारी द्वारा कार्यालय से पत्र प्राप्त करने को कहा गया । किंतु छात्र ने कहा कि पत्र पुलिस के सामने ही दिया जाए। इस पर पुलिस ने कहा कि अब कह तो दिया है, आप कार्यालय से ले लीजिए ।छात्र ने कहा प्रशासन ठीक नहीं है। मैं जानता हूं यह कार्यालय में जाकर के पुनः जालसाजी करेंगे अतः मुझे पत्र आपके समक्ष ही चाहिए इस पर मजबूर होकर अधिकारी को पत्र मुहैया कराना पड़ा। इससे यह स्पष्ट है कि कैसे कुछ संस्थानों में बैठे अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्रों का शोषण करते हैं।

    आत्मकथा.......



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