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    उपासक
    8 July

    अहं सौन्दर्यस्य अभिलाषकः तु अस्मि, परन्तु साधकः उपासको वा नास्मि। उपासकस्तु अहं तत्प्रेमरज्जोः अस्मि यत् द्वे पृथक्मनसोः एकस्मिन् सूत्रे संयोजयित्वा एकं करोति। 

    मैं सौन्दर्य का अभिलाषी (चाहने वाला) तो हूँ, परन्तु साधक या उपासक नहीं । उपासक तो में उस प्रेमरज्जु (प्रेमधागा) का हूँ जो दो पृथक्- पृथक् हृदयों को एक कर देता है ।

    #मेरी_सोच

    #कुलदीपगौडजिज्ञासु



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