Trending News
    कवितायें

    प्रेम का गीत मैं भी सुनाऊँ तुम्हें

    प्रेम का गीत मैं भी सुनाऊँ तुम्हें
    8 July

    प्रेम का गीत मैं भी सुनाऊँ तुम्हें

    ज़िन्दगी में अगर तुम चले आओगे

    सब ग़मों से भी मैं दूर हो जाऊंगा

    अपने गम मुझको देकर मुझे चाहोगे।

    रोज़ दिखती है सबको मेरी बेरुखी,

    दिल में क्या है ये दिखता नहीं है कभी

    पास आकर मिलोगे समझ जाओगे,

    दूर रहकर मिलोगे तो डर जाओगे

    मैंने आवाज़ दी सबको आवाज़ दी

    देखो टकराई और लौटकर आ गयी

    कुछ असर ना हुआ मुझको तड़पा गयी।

    मैंने सोचा न था मैंने सोचा न था।

    निजाक्षर✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

    कुलदीप गौड़ "जिज्ञासु"



    Comments

    You May Also Like

    ×

    कृपया हिंदी भाषा में खोजें!