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    मेरी डायरी 04/01/2020
    7 January

    यदि आप तार्किक आलोचना नहीं कर सकते तो आपको किसी को अपनी पसंद से रोकना नहीं चाहिए। यह आवश्यक नहीं कि आपको दीपिका पसंद है, तो मैं भी दीपिका को ही पसंद करूँ।

           जिस प्रकार का मन-बुद्धि-परिवेश होगा तदनुकूल ही सृजन हो सकता है, अथवा दशाओं की अनुकूलता पर श्रम होता है।

              आप मुझे नापसंद करें मुझे मंज़ूर है। आप मेरी निंदा करें मुझे वह भी स्वीकार है। किन्तु मैं आपके संस्कारों आपकी रूचि के अनुसार कार्य नहीं कर सकता, मैं प्राप्त परिस्थितियों के अनुसार श्रेष्ठ कर्म कर सकता हूँ, (श्रेष्ठता मेरी योग्यता पर निर्भर है मैं जितना योग्य हूँ उतना ही श्रेष्ठता का स्तर भी हो सकता है योग्यता कम हो तो सर्वश्रेष्ठ नहीं कर सकता न श्रेष्ठकर्म करने का दम्भ भर सकता, हाँ सीखने हेतु हमेशा प्रतिबद्ध हूँ, इसीलिये तार्किक आलोचना/निंदा/प्रशंशा का पक्षधर हूँ) साथ ही आवश्यकता से अधिक झुक नहीं सकता, जो झुकाव विनाश करे व स्वाभिमान हिला दे मुझे इससे थोड़ा दूर ही रहना है।

            मेरी परिस्थितियाँ केवल मैं जानता हूँ, बीता हुआ कल, चल रहा आज और संभावित भविष्य मेरी आँखों के सामने घूमता है, दो लफ्जों में क्या मैं तुम्हें बता सकता हूँ? क्या तुम बता सकते हो?

    04/01, 9:31 PM कुलदीप गौड़ "जिज्ञासु"



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