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    एलटी भर्ती 2014 विशेष

    एलटी भर्ती 2014 विशेष
    8 July

    बहुत दिनों बाद इस ग्रुप पर कुछ कहने का मन हुआ आशा है आप धैर्य के साथ मनन करेंगे । जैसा कि मैं प्रारम्भ से ही आप लोगॊं के लिए नकारात्मक व्यक्ति रहा हूँ जो कि ग्रुप में नकारात्मक बातें फ़ैलाता है तो दोस्तों आज भी मैं कुछ नया नहीं कहने जा रहा हूँ बल्कि उन्हीं बातों को दोहरा रहा हूँ इसलिए कि अब तक के अथक परिश्रम के बाद भी “हासिल शून्य” के बाद शायद मेरी बातें समझने योग्य हो गई हों वो कहते है न “समय ही सब ज़ख्मों का मरहम है ।“ तो बात यह है कि मुझे लगता है प्रतीक्षारत एलटी वालों ने २५% वृद्दि को प्राथमिकता देकर या यूँ कहें केवल २५% वृद्धि पर् फ़ोकस करके अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मारी है । वह ऐसे - एलटी प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के पास दो विकल्प थे नियुक्ति पाने के, जो कि सौभाग्य की बात है क्योंकि ऐसे अवसर बहुत कम ही होते हैं । पहला विकल्प था २५% वृद्धि दूसरा विकल्प था एलटी व प्रवक्ता पदों पद समान रूप से चयनित अभ्यर्थियों के एलटी पद को त्यागकर प्रवक्ता पद पर नियुक्ति लेने पर रिक्त पर एलटी प्रतीक्षारत की नियुक्ति हेतु नियम बनाना । ऐसी अवस्था में २५% समर्थक यदि द्वितीय विकल्प को प्राथमिकता देते व प्रथम विकल्प पर भी ध्यान रखते तो सरकार को भी आसानी रहती निर्णय करने में ।

    दोस्तों प्रवक्ता के १२०० विज्ञापित पदों में संभवतः ४०० से ५०० अभ्यर्थी ऐसे है जो दोनॊं पदों पदों पर चयनित हैं और प्रवक्ता पद के एलटी की अपेक्षा उच्च व प्रतिष्ठित पद होने के कारण अवश्य प्रवक्ता पद पर नियुक्ति लेंगे । यदि ये पद २५% समर्थकों को मिल जाते हैं तो २५% नहीं तो कम से कम २०% प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का उद्धार तो सीधे है और यदि २५% भी बढ जाता है तो सीधे ४५% की बढोत्तरी जो कि सोने पर सुहागा वाली बात होगी । इस विकल्प में ज्यादा पेंच भी नहीं है इसमें सरकार को वोट बैंक भी दिखाई देगा जो कि निर्णय देने हेतु प्रोत्साहन का कार्य करेगा । इस पद पर दोनों पदों पर चयनित अभ्यर्थी के नियुक्ति ले लेने के कारण अतिथिशिक्षक तो वैसे ही बाहर है तो सरकार के लिए यह सरदर्द भी नहीं । मेरी दृष्टि में इस विकल्प को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए । आप भी विचार करें व परामर्श दें । स्वागत है ।


    अब पहले विकल्प की बात करता हूँ -२५% वृद्धि पर बहुत पेंच है व सरकार के लिए निर्णय लेना आसान भी नहीं है । पहला तो यह कि यदि ये पद बढाये जाते हैं तो नई भर्ती हेतु रिक्त पदों की संख्या कम होगी जिससे न्यू बीएड टीईटी वाले सरकार के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ेगा और अतिथिशिक्षकों पर भी जो कि सरकार का चुनावी टारगेट है । दूसरा यह कि सरकार के पास २५% “अधिकतम” वृद्धि का अधिकार है याद रखें "अधिकतम" यदि उपरोक्त समस्या से निपटने के लिए व २५% अभ्यर्थियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए सरकार कुछ वृद्धि (१०%, १५% अथवा २०%) कर भी देती है तो स्वयम् २५% वाले धड़ में फ़ूट पड़ जायेगी अतः यह भी आसान नहीं है । और एक महत्वपूर्ण बात २५% सरकार को “बढाना ही पडेगा” ऎसा कोई संवैधानिक नियम भी नहीं है अतः इस सन्दर्भ में न्यायालय भी नहीं जाया जा सकता । सरकार वृद्धि न भी करे तो भी सरकार का कुछ नहीं बिगड़ने वाला । रही वोट न देने की धमकी देने वाली बात तो उसमें भी कुछ दम नहीं क्योंकि यदि सत्तासीन दल को वोट नहीं भी देंगे तो देंगे किसको? विपक्ष को ? पर नहीं । क्योंकि वह भी तो इसका समर्थन नहीं कर रही । बचे अन्य दल उन्हें वोट देकर क्या हश्र होना है इसका जीता जागता उदाहरण आपके सामने पीडीएफ़ अथवा मंन्त्रीप्रसाद नैथानी है जिन्होंने शिक्षाव्यवस्था व बेरोजगार युवाओं का क्या हाल बना रखा है इसे बताने की आवश्यकता नहीं । यह बात तभी समझ आयेगी जब राजनीति के नियमों में रुचि (इन्ट्रेस्ट) हो । अपनी बात - कुछ लोग कह रहे हैं कि पिछली नियुक्तियों में हर बार २५% बढे हैं इसलिए इस बार भी बढाया जाना चाहिए । मांग सही है परन्तु यदि सिर्फ़ माँग है तो । यदि दुराग्रह है तो सही नहीं इसे एक उदाहरण से स्पष्ट करना चाहुँगा - कोई धनी व्यक्ति था जिसके पास पर्याप्त धन था एक दूसरा व्यक्ति था जिसे २ रुपयों की आवश्यकता थी उस व्यक्ति ने प्रथम व्यक्ति से २ रुपयों की याचना की प्रथम व्यक्ति ने दयालुता दिखाते हुए उसे २ रुपये दे दिये । पुनः ऐसी ही अवस्था आयी धनी व्यक्ति ने पुनः द्वितीय की सहायता कर दी । इसी प्रकार तीसरी बार भी प्रथम व्यक्ति द्वारा द्वितीय व्यक्ति की सहायता की गई। परन्तु जब चतुर्थ अवसर आया तो प्रथम व्यक्ति ने सहायता करने से मना कर दिया । अब बताइये क्या द्वितीय व्यक्ति यह कह सकता है कि जब तीन बार सहायता की गई तो चौथी बार भी करे । या फ़िर जब चौथी बार सहायता नहीं करनी थी तो पहले तीन बार सहायता की ही क्यों गई ? विचार कीजिए क्या पहले तीन बार सहायता करने से हार बार सहायता करने का नियम बन जायेगा ? यह कुतर्क नहीं तो और क्या है ? सरकार को सजग करने के लिये या यूँ कहें चेतावनी देने के लिए (ताकि वे सत्तालोलुपता में गलत निर्णय न लें) एक बार आंदोलन आवश्यक है । दोस्तों मै भी प्रतीक्षासूची मैं हूँ और आपकी तरह मुझे भी जीविकोपार्जन का साधन चाहिए और इस हेतु मेरा जो करणीय है वह मैं कर भी रहा हूँ आपके सुझाव भी आमन्त्रित हैं । यदि उपरोक्त विचारों में संशोधन की आवश्यकता है तो कॄपया एक अज्ञानी समझकर मार्गदर्शन करने का कष्ट करें । यह सिर्फ़ मेरा अपना मन्तव्य है, पाठकों हेतु आदेश नहीं ।

    ................................... विचारणीय प्रतिक्रियाभिलाषी

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    कुलदीप गौड़ “जिज्ञासु”



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