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    कवितायें

    गुरुस्तुति पंचकं

    गुरुस्तुति पंचकं
    6 July

    शक्ति श्रद्धा हो सभी में

    गुरु मिलें उपकार हो

    पुष्प बन महकें धरा पर

    जन्म यह साकार हो।।१।।


    है नमन उनको जिन्होनें 

    रत्न रज को है किया।

    हो दमन उनका जिन्होनें

    रत्न को रज कर किया।।२।।


    हो कलुष जिसके हृदय में

    दूर गुरुवर ही करें।

    सत्य के पथ पर चलें,

    और गुरु बिना हम ना रहें।।३।।


    गुरु हमें छोड़ें नहीं और

    मुख कभी मोडें नहीं।

    हम गलत जो हो चलें

    तो गुरु हमें कर दें सही।।४।।


    दुर्गुणों को दूर करके

    हमको उत्साही करें

    हम नमन उनको करें 

    वे स्नेह से दीपक भरें।।५।।

    निजाक्षर✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

    कुलदीप गौड़ "जिज्ञासु"

    मेरे उन सभी गुरूजनों को समर्पित जिन्होनें मुझे अपनी चेतनता से गतिशील बनाया, जो कुछ मुझमें सत् है उसकी स्थापना की, और जो कुछ कलुष विद्यमान है उसको भी गुरूजन दूर करें यह कामना करता हूँ।



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