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    कवितायें

    द्वंद और मार्गदर्शन

    द्वंद और मार्गदर्शन
    8 July

    पूछा मैंने जब-जब उनसे

    मिला यही उत्तर है तब से

    हो कोई भी द्वन्द्व तुम्हारा

    वही करो जो उचित लगे।

    करना तो है ही कुछ मुझको

    करूँ वही जो उचित लगे, तो

    पुनः लौटकर आते हैं,

    मुझको फिर से समझाते हैं।

    यह सही नहीं जो कर बैठे

    हो सही! मगर क्यों कर बैठे?

    फिर वही प्रश्न है, दुविधा में

    बोलो कर्तव्य हमारा क्या?

    फिर भी उत्तर है एक यही

    तुम वही करो जो उचित लगे।।

    #निजाक्षर✍✍✍✍



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