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    दैनन्दिनी

    अनुभूति, १९-०५-२०१९

    अनुभूति, १९-०५-२०१९
    8 July

    मैं जानता हूँ मुझे अपने लोगों का आशीर्वाद नहीं मिलता। अगर मिलता तो मैं यूँ अकेला नहीं रहता, लेकिन मैंने अपनी ज़िन्दगी में अपने कर्मों से बहुत से लोगों का विश्वास जीता है, और वह विश्वास मुझे आशीर्वाद भी प्रदान करता है। कुछ तो उसका भी असर होगा, उसका असर होता है इसीलिए तो मैं मैदान पर डटा रहता हूँ। मैं आज तक भले ही जीत नहीं पाया हूँ, लेकिन इतिहास गवाह है, मैं आज तक हारा भी नहीं हूँ। अभी मेरी प्रयोग करने की उम्र है, इसलिए मैं खुद को ज़िन्दगी की हर परीक्षा में आज़माता हूँ। जीत भले ही न मिले, लेकिन आत्मविश्वास और आत्मबल बढ़ाता हूँ। यही कारण है कि मैं रुकता नहीं हूँ। जब समय को समझा दूँगा और अपना साथी बना लूँगा, तब मेरा आत्मबल मुझे सामाजिक सफलता और परिणाम भी देगा। समय किसी का नहीं है, समय दोस्त भी नहीं है दुश्मन भी नहीं, लेकिन दुश्मन भी दिखाई देता है और दोस्त भी, बस समय के साथ अपने कर्मों की आहुति ज़रूरी है जैसी आहुति होगी वैसा परिणाम होगा, समय दोस्त भी बन सकता है, यही काम मैंने भी अब तक किया है, देखना है समय दोस्त बनकर साथ निभाता है या दुश्मन बनकर सामने खड़ा हो जाता है ।



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