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    ०९/०६/२०१९
    8 July

    साला हम तो मर गए किसी को अपना बनाते बनाते। ये कौन सी दुनिया बसाई है, एक अच्छा खासा समय और अनेक कर्मो में भूमिका निभाने के बाद भी अगर समझ नहीं आता तो ज़रूर नरक के द्वार पर श्राद्ध/तर्पण का जल मांगते हुए मिलोगे।

    जहां तक मेरे शब्द मेरी भावना पहुंचनी चाहिए, कोई जरिया ही नहीं है कि वहाँ तक पहुँचे, रिश्ते में छोटे होने का दुःख मैं जो झेल रहा हूँ पता नहीं क्या है और कितना है। पर जो कुछ है, है ज़रूर।

    अगर भगवान, स्वर्ग, नरक यदि कुछ है तो शायद कभी कुछ जगे, अभी तो सब कुम्भकर्णी नींद है।



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